मुक्ति नाथ त्रिपाठी "मृदुल"
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— कविता संग्रह —
मृदुल काव्य कोष
✦ प्राक्कथन पढ़ें — श्रद्धा-सुमन ✦
❧ प्रथम संग्रह ❧
बदल दो साथी
स्वर्ग से बढ़कर
खबर देता रहूँगा
बोली कैसे
दे प्यास, अधर को जल न दिया
जान लो मेरी कलम तुम
कैसे कोई
चाँद न जाने
प्रिये ! प्राण से
मैं गायक
कैसी मेरी
फूल शूल के
मैं अन्धकार से
गीत दूँगा
ओ ! मेरे दर्दीले होठो
विज्ञान, प्रगति तथा चाँद
खुला द्वार
छाई रही उदासी
मेरे वस की
तुम मिली
मैं भी गीत
साथी दीप जलाता चल
आज स्वदेशी
रहा पताका उनका
समझ न पाई मौन इशारा
गई लूट ले गई
फूल के
उस चौराहे
जब बँधी जिन्दगी प्यार की डोर से
मुस्कराता चाँद नभ में
छोड़ दे माझी
बापू के नाम पाती
मैं वक्ता हूँ
परवाह नहीं
नहीं
सहा सहता रहा
कुछ मुक्तक
कवि की पाती — बापू पर
नहीं झुकेगा लाल बहादुर
पत्नि
मेरी कहानी
प्यास
साधना
साध
दर्द
विश्व
तुलसी द्वारा
तुलसी के प्रति
तुलसी दास — नमस्कार
तुलसी दास — कवि के भावों का
❧ द्वितीय संग्रह ❧
तुलसी दास — ऋणी रहेगी मानवता
जब भी माँगा
आज गूँगी चाह मन की
स्नेह-दीप
ला दो कलम और दावात
हमला वारों से
नहीं रुकता पथिक पथ पर
जनता दीप
काशी
शासन
जन्म लिया इसलिए
बुझे सितारे आते हैं
दीप जलाना
प्रतिभाष
सोचूँगा खातिर
प्यार का दीप
दो हाथ मिले
यही हमारा नारा है
सुनो भुट्टो
कुर्बानी का वक्त — शिवा
देश — हम अहिंसा के पुजारी
न मुझसे दोनो
देख न तम
पत्र तुम्हारा पाकर
दर्द पीकर दर्द की आवाज देता हूँ
विरह गीत
मैं सच कहता हूँ
उद्गार
विरान न वार
शत्रु भग जायगें
अब राम नाम हो जपना है
चाँद तो
मिलन हो
जहाँ मिलो हृदय में
फिर वही अपराध
न शरमाओ प्रिये, आओ
प्यार का मौसम
नदी की धार
कर तो सुभग श्रृंगार
नदी की धार मत रोको
प्राण! मत सोचो
चमक रहीं सीमा पर
एक इंच हम भूमि न देंगे
सुनो पाक
महफिल में गीत
झलक न पाया
ध्येय
पूत नहीं कहलाओगे
महफिल सजाने वालों
फिर बुलाया है
जाने सपनों में
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