वहाँ प्यार का दीप जलाने का अधिकार न मुझसे छीनो
टूट गये सपनों पर
रूठ गये अपनों पर
आँसू के दो बूँद बहाने का अधिकार न मुझसे छीनो
सब है मिला नहीं वह केवल
रूप नहीं जिसमें आकर्षण
उसमें नहीं सपन की दुल्हन
विर उदास नगरी से सूरज गरी दीदारी री
अधर प्रति करकी प्यास बुझाने का अधिकार न मुझसे छीनो
किस्मत में जो द्वार मिला है
वह वही जो प्यार मिला
जी शी जिसको तो शुभ
घेरा महाँ किसी का
होता नदी रावेरा
वहाँ प्यार का दीप जलाने का अधिकार न मुझसे छीनो
प्रीत पर खिल फलता जलता
जन्मने पर भी तो जिलता
पाधक छोड़ भाप जो पिल
लो खुद अपनी जान विफलता
ढीले उन तारों को
महासिल
जनवो हाथ बनाये वर तिरागे न मुझसे छीनो
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