आदमी तो चलता नहीं है पथ पर,
उम्मीद ही उसको राह पर चलाती है।
जब ध्येय का पग बढ़ जाता है आगे,
मंजिल खुद-ब-खुद चरणों पर आ जाती है।
ताकत बिना चैन की बंशी जग में नहीं बनाई जाती,
लिए बिना पतवार करों में पार न नाव लगाई जाती।
मौसम आज यही कहता है, भावुकता में मत रहो साथी,
कायरता की लाठी से जीती नहीं लड़ाई जाती।
मातृभूमि का कण-कण भी प्राणों से प्यारा होता है,
इसलिए मेरी सुनो, महफिल सजाना छोड़ दो।
हाथ में हथियार लेकर, देश हित बलिदान होकर,
तुम शहीदों की कड़ी में नाम अपना जोड़ दो।
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