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— कविता —
मुक्ति नाथ त्रिपाठी "मृदुल"
देश — हम अहिंसा के पुजारी

हम अहिंसा के पुजारी पर न हिंसा से है डरते

बुद्ध जिनको हम दिये है युद्ध उनको दे सकते हैं,
मौत से श्रृंगार करते आन पर जब आँच आती,
प्राण से बढ़ कर है अपनी भूमि से हम प्यार करते।

है शरारत कर रहा वह कौन सा हैवान है।
ना उठा पंजाब सारा जब उठा बंगाल है,
आज मंदिर और मरिजद एक ही चौपाल है,
एक ही आवाज में हैं बोलते कुरान गीता,

सगुओं के चारते यह एकता सुन काल है।
कौन कहता आज खतरे में हमारी आन है।

है अनेको धर्म फिर भी एक सबका राग है,
एक माँ के सब दुलारे एक सा अनुराग है,
चाह सबके है हृदय में एक देने के लिए प्राण को
सेना निकालो देश से यह माँग है,

जय जय जय जय हिन्दुस्तान ।

चकना दूर हुआ भुट्टी के अभिमान का
हिंसा हिरावी साची वह थी, रोवरोट का इयारी,

जय जय जय जय हिन्दुस्तान

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