जन्म लिया इसलिए कि पीड़ा
होश में पीर वाली हो, गाये
उम्र अमावस की बढ़ जाये।
नयन करे श्रृंगार अरे
दूर न जाने महान नगर से
सूर न मिटने पाये तन से
जन्म लिया इसलिए कि विछुड़न
मेहदी अपने हाथ रचायें।
गायक हूँ मैं दर्दवाद का
पतझर की मैं हूँ अभिलाषा
लुटी जवानी ही समझेगी
मेरे गीतों की यह भाषा
जन्म लिया इसलिए कि उलझन
भी इस जग में सेज सजाये।
अपयस पहन न पाता कंगन
न साथ पाती कहीं उदासी
बंशी बंशी बनती नहीं पीर की रहती चिन्ता कभी न प्यासी
जन्म लिया इसलिए कि उपयस
अपने आंगन दीप जलायें।
जीला होता नहीं बिछौना
डोली पड़ती नहीं पावना
घुटन न हँसकर बातें करती
विधवा होती नहीं साधना
जन्म लिया इसलिए कि विधवा
बाग नई गोरी कहलाये ।
प्यार न अन्तिम साँसे गिनता
बेड़ा होती नहीं कलाई
लग्न न ऐसी आती जिसमें
माँग न भरती कभी जुदाई
जन्म लिया इसलिए कि तड़पन
माथे पर रोली लगवायें।
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