तुम टुकराती तो हुड़राह हो परवाद नहीं
तेरे घावों को रहाने उठाया
तुम शत नुकड़ी दीप हमारे त्यागन का
तेरे त्यागन दीप नहाना त्यागया
हर रात अमावस मेरे लिए दिवाली है।
तेरे सपने गर खिले चाँद के आँगन में
यह बात हमारे लिए बड़ी मतवाली है।
गर घी के दीपक जले तुम्हारे आँगन में।
सम गा मेरे आँगन में उजियाला है।
विष का प्याला गर अपने हाथों से दो तो
समझेंगा तुमने दिया प्यार का प्याला है।
मेरे आँगन का दीप धुँवा पहने चाहे।
तेरे आँगन का दीप नहीं बुझाने दूँगा।
हो भले हमारे आँखों में आँसू बता जितना
तेरी साझ की तुम्हारी मुहब्बत में उठाना
यह बात अनोखी लग सकती है दुनियाँ को
मेरी बातों को झूठ कहे तो कहने दो ।
मैं नहीं चाहता दुनियाँ से बाँदी सोना।
जैसा मैं हूँ वैसा ही मुझाको रहने दो।
जो निर्धन, केवल आँसू जिसकी आँखों में।
निर्धन की आँखों के आँसू का मूल्य नहीं।
धनियों की आँखों का आँसू भी मोती है।
है कैद चाह निर्धन की सुनो विवशता में।
धनियों की इच्छायें महलों में सोती है।
पूर्णिमा करता हर रोज़ तुम्हारा अधर प्यारा
पर मत भूलो हर रात पूर्णिमा ढलती है।
पाठक टिप्पणियाँ