दर्द दो मुझको, तुझे मैं गीत दूँगा,
बाँध का स्वर में जिसे, संसार सारा गा सकेगा ।
वेदना की क्यारियों में,
भावना के फूल खिलते,
और तम की बाहुओं में,
कल्पना के दीप जलते,
वेदना दो, मैं तुझे अनुमान दूँगा,
साधकर गति आँधियों में, पाँव मंजिल पा सकेगा ।
तड़पनों की घाटियों में,
गीत की गति-ध्वनि थिरकती,
उलझनों की आँधियों में,
साधना की माँग भरती,
दो तुझे तनहाईयाँ, लय-सुर तुझे दूँ,
क्रन्द में बँधकर तुम्हारे प्राण तक जो जा सकेगा ।
आह की आवाज सुनकर,
मूक मुखरित हो सका है,
अश्रु की बरसात से ही,
शोर मातम का रुका है,
अश्रु दो मुझको, तुझे साहित्य दूँगा,
रूप तेरा क्या, तुझे यह आईना, दिखला सकेगा ।
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