दे प्यास, अधर को जल न दिया ।
अभिलाषाओं की किस्ती दी,
आगे बढ़ने का साज़ दिया,
पतवार थमा दी हाथों में,
बढ़ने का हर अन्दाज दिया,
दे धार, कभी साहिल न दिया ।
दे प्यास, अधर को जल न दिया ।।
मौसम मधुमास दिया, जिसने
सुमनों का वास दिया जिसने
जिसने, यौवन में रंग भरा,
मन को विश्वास दिया जिसने,
दे चाह, कभी आँचल न दिया ।
दे प्यास, अधर को जल न दिया ।।
पलकों की सपनों की बगिया,
दी, दीपक की हर ज्योति किरण,
नयनों की सेज सुमन की दी,
आकर्षण का सारा बन्धन,
दे रवप्न, नयन-काजल न दिया ।
दे प्यास, अधर को जल न दिया ।।
हो सकूँ खड़ा, आधार दिया ।
हर साहस का संसार दिया,
अंजाम दिया पर उड़ने का,
आश्वासन बारम्बार दिया,
दे हाथ, कभी सम्बल न दिया ।
दे प्यास, अधर को जल न दिया ।।
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