ऋणी रहेगी मानवता उसके पावन उपकार का ।।
रात्य कल्पना का जो गायक
वाणी जिसकी गंगा जल है,
राम भजन का जो है साधक,
जिसका मन पावन उज्ज्वल है,
उसका जो निर्धारित पथ, वह पथ है साथी प्यार का
ऋणी रहेगी मानवता उसके पावन उपकार का ।।
उसने दीप जलाया जो था
उसकी बाती अजर अमर है,
कभी नहीं वह दीप बुझेगा
जिसका जनगीत वर्ष अमर है,
उसके कर से जलने वाला दीपक जो उजियार का
ऋणी रहेगी मानवता उसके पावन उपकार का ।।
जड़ में चेतनता जो भर दे
गूंगे में जो भर दे वाणी
धर्म मार्ग से विचलित पत्र में
साथी भर दे नई रवानी
नमन करो उस महा कवि को नमन से उपकार का
ऋणी रहेगी मानवता उसके पावन उपकार का ।।
भावों का उसका पनघट है
जो अज्ञानी की प्यारा बुझाते
रास्वती का वरद पुत्र था
राम गुणों का वह था गायक,
उसके पत्र पर झुका हुआ है माथा इस संसार का
ऋणी रहेगी मानवता उसके पावन उपकार का ।।
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