पूछो नहीं मुझसे मेरी कहानी,
जलता जिगर मेरा, उजड़ी जवानी
रात न भाती मुझको चाँद न भाता,
छम छम पायल अब न सुहाता,
जिया तड़पाये मेरा कोयल गाकर,
आंगन में कोई मेरे बिनाता,
आँसू में लिपटी मेरी जिन्दगानी ।
प्रीति पहन आई अनबन की बोली
पीड़ा मिली मुझे चलते डगर पर,
माथे पर मेरे अपया की रोली,
हाय ! न जाने क्यों दुनियाँ बेगानी ।
कुछ दिन पहिले दीप जले थे,
स्नेह के तारे आँचल तले थे,
वाहों में मेरे कोई आशुरमाता,
प्यार की बगिया में फूल खिले थे,
बात नहीं यह बहुत पुरानी।
द्वार मिलन के बंद हमारे,
बिलखें हृदय दो सरिता किनारे,
भूला न जाता उनके नयनों का काजल,
आँसू बहावा मनवा उनको पुकारे,
तड़पतड़प कर साध हमारी
रोई गई भीग गलमल की सारी
झलक न पाई उनको, साध विचारी
छलके नयन से छल-छल पानी ।
माथे पे मेरे उपवन का सेहरा,
नयनों में मेरे आँसू का पहरा,
प्यास बुझी नहीं पनघट पे जाकर,
उम्र घटी नहीं आँसू बहाकर,
मुझको न लगती अब प्रीति सुहानी ।
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