तुम मिली प्यार का दीप जलने लगा ।
मिलन का चाँद, आँगन मेरे उतरने लगा ।
तुम मिली, जिंदगी को जवानी मिली,
रात जो भी मिली वह सुहानी मिली,
पाँव वैसे तो चलते रहे राह पर,
पर तुम्हारे ही कारण रवानी मिली,
देख पतवार, मझधार टलने लगा ।
तुम मिली प्यार का दीप जलने लगा ।
हाथ कंगन जड़ने लगी साधना,
प्यार का गीत गाने लगी कामना,
गीत थे जो अधूरे वे पूरे हुए,
पाँव मेहंदी रचाने लगी कल्पना,
गीत के हाथ कंगन, चमकने लगा ।
तुम मिली प्यार का दीप जलने लगा ।
रात रानी खिली, देख दिल का मिलन,
चाँदनी आ गई, छोड़ अपना गगन,
अध खिली स्वप्न की हर कली खिल गई,
डाल पर रात पर फुलनगियों पर सुमन,
स्वप्न के होठ चुम्बन, महकने लगा ।
तुम मिली प्यार का दीप जलने लगा ।
चाह की सेज पर, वीन बजने लगी ।
रागनी की गली प्रीति सजने लगी,
प्रीति की डोर से जिन्दगी जब बंधी,
प्यार के पाँव पायल झनकने लगी,
होठ की, डाल, पंछी, चहकने लगा ।
तुम मिली प्यार का दीप जलने लगा ।
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