← कविता सूची
— कविता —
मुक्ति नाथ त्रिपाठी "मृदुल"
नहीं झुकेगा लाल बहादुर

हठ गुट्टों तुम व्यर्थ न ठानो,
भारत को कमजोर न मानो,
पूर्ण न होगा, तेरा रापना, भारत का बलिदान बोलता ।
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-पारसी एक साथ, अभियान बोलता ।।

ले अपनीं प्राण हथेली पर,
बच्चा-बच्चा तैयार यहाँ,
दुश्मन से आज निपटने को,
स्वागत के लिए उपस्थित है,

इतिहास हमारा साक्षी है,
साहस का बल, हथियार यहाँ

पूरा कश्मीर हमारा है,
यह प्राणों से भी प्यारा है,
जो इसे चुनौती देता है,
वह पहला शत्रु हमारा है,

हिन्दू-मुस्लिम-सिख इसाई,
मन्दिर-मरिजद, एक इकाई,
सारा हिन्दुस्तान, बोलता ।
पूर्ण न होगा, तेरा रापना, भारत का, बलिदान, बोलता ।।

आजाद वतन के वीर, नहीं,
विचभ्रलित होते है, देख कहर,
कर्तव्य हमारा, निश्चित है,
अब्दुल हगीद की कुर्बानी,
दिखलाती हमको यही डगर,

नहीं झुकेगा लाल बहादुर, भारत का अभिमान, बोलता ।
पूर्ण न होगा, तेरा रापना, भारत का, बलिदान, बोलता ।।

papaji Photo
← कविता सूची

पाठक टिप्पणियाँ