प्रिये ! प्राण से, मिटा न देना ।
प्यार मिलन की रात का ।।
क्षण वह गंगा, क्षण वह जमुना,
वह पावन कैलास है,
मेरे लिए वही क्षण, केवल
जीवन का मधुमास है,
प्रिये ! प्राण से, भुला न देना ।
वह क्षण, मेरे साथ का ।।
बाहों का वह हार, गले में,
खिला, महकता फूल है,
मेरे लिए, सुमन हर वृन्दा-
वन का, चुभता शूल है,
प्रिये ! प्राण से, हटा न लेना ।
हार, गले से हाथ का ।।
मनमोहक वे गीत लाज के,
आकर्षण के धाम हैं,
मेरे लिए न, स्वर्ग दूसरा,
केवल वही, मुकाम हैं,
प्रिये ! प्राण से, बुझा न देना ।
दीप, लजाते गीत का ।।
दामन और नहीं पकड़ेगा,
कोई इस बदनाम का,
मेरे लिए डगर पथ होगा,
केवल पूर्ण विराम का,
प्रिये ! प्राण से, छोड़ न देना ।
देना साथ, अनाथ का ।।
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