← कविता सूची
— कविता —
मुक्ति नाथ त्रिपाठी "मृदुल"
शत्रु भग जायगें

पूरब पश्चिम उत्तर की सीमा पर,
वीर खड़ा है, पाक अड़ा है,
आज़ादी पर आँख गड़ाये।
शत्रु भग जायगें!

जब तक न झुके सर दुश्मन का,
हम डटे रहेंगे।
सीमा पर गाते गीत,
हम जागते रहेंगे।

खाते पीते भारत के हैं, परगीत विदेशी गाते हैं,
बरबाद देश ती होगा ही,
दुश्मनों को घर से भगायेंगे।

चीन पाक, उनके पीछे वाली,
पर गती हम तुझको कागज जैसा फाड़ेंगे,
नींबू जैसे चटनी जैसा हम चाटेंगे।
बात नहीं मानोगे तो हम तेरा
जरन मनायेगे।

दुल्हन बन जाये रण चण्डी, माड़ी वन जाये समर भूमि,
रक्त दुश्मन का के सिन्दूर बने, माला वन जाये शुभ मुण्ड मन्नु।
बन्दूक तोप बारूद लिए बाराती आये झुण्ड झुण्ड,
दुश्मन की मार भगायेगे, माता की लाज बचायेगे।

papaji Photo
← कविता सूची

पाठक टिप्पणियाँ